#3 Salvation - उद्धार | परमेश्वर कि एक योजना, ताकि मनुष्य फिरसे अपने अस्तित्व को पा सके |

 

  • मनुष्य परमेश्वर कि महिमा से दूर हो गए थे, जिसके कारण परमेश्वर को एक योजना बनानी पड़ी |
  • "उद्धार" कि योजना |
रोमियों:३:१०-२४

10जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।
11कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं।
12सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।
13उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है।
14और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है।
15उन के पांव लोहू बहाने को फुर्तीले हैं।
16उन के मार्गों में नाश और क्लेश हैं।
17उन्होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना।
18उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।
19हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे।
20क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।
21पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं।
22अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं।
23इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।
24परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं।

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